एक था राजा…

ब्रिटिश भारत की सैकड़ों रियासतों में से “भावल रियासत” भी एक थी। आज यह स्थान बांग्लादेश में ढाका के पास जयदेवपुर में है। उस ज़माने में भावल रियासत पूर्वी बंगाल की दूसरी सबसे बड़ी रियासत थी। इसके अधीन हज़ारों वर्ग किमी भूमि, सैकड़ों गाँव, और लगभग पाँच लाख की जनसंख्या थी। इसकी वार्षिक आय उस …

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काश्मीर की कहानी (भाग-4)

यह विडंबना है कि जिस अब्दुल्ला परिवार के शासन में 1989 में लाखों काश्मीरी पण्डितों को काश्मीर छोड़कर अपने ही देश में शरणार्थी बनना पड़ा, स्वयं उस अब्दुल्ला परिवार के पूर्वज भी कश्मीरी पण्डित ही थे। सन 1766 में एक सूफी मीर के प्रभाव में आने के बाद वे मुसलमान बने और दिसंबर 1905 में …

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बेरोजगारी या अयोग्यता?

मेरे करियर की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी। तब मैं कुछ वेबसाइटों के लिए लेख लिखता था। ये लेख बहुत बेसिक होते थे और पैसे भी बहुत कम मिलते थे। इसलिए मैने सोचा कि कुछ और भी किया जाए। तब मैंने ब्लॉग बनाना नया-नया सीखा था, तो मैंने एक और ब्लॉग शुरू किया और …

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काश्मीर की कहानी (भाग-3)

आंग्ल-सिक्ख युद्ध के बाद हुई संधि के तहत अंग्रेज़ों ने 75 लाख रुपये के बदले डोगरा राजा गुलाब सिंह को जम्मू के साथ-साथ काश्मीर व लद्दाख के इलाके भी बेच दिए और इस प्रकार वर्तमान जम्मू-काश्मीर राज्य की सीमाएं बनीं। लेकिन इस संधि के बावजूद भी अंग्रेज़ों ने किसी न किसी बहाने राज्य के कामकाज …

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What are India’s new ‘Farm Laws’?

(हिन्दी में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें) First Farm laws in British Raj After Britain’s Industrial Revolution, when a large number of factories were built and rapid industrial production was started, the most important factor to run those factories was to ensure uninterrupted supply of raw material. India was the biggest source of raw …

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काश्मीर की कहानी (भाग-2)

(पहला भाग यहाँ पढ़ें) आजादी के बाद लगभग 565 रियासतों का भारत में पूर्ण विलय हो गया। लेकिन काश्मीर को लेकर आज तक विवाद क्यों चल रहा है? पढ़िए कश्मीर की पूरी कहानी मेरे ब्लॉग पर। पिछले भाग में मैंने बताया था कि सन 1846 में अमृतसर की संधि हुई और अंग्रेजों ने जम्मू के …

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निरीक्षण और निष्कर्ष

एक होता है निरीक्षण और एक होता है निष्कर्ष। ये दोनों अलग बातें हैं। निरीक्षण का मतलब घटनाक्रम को देखना और समझने का प्रयास करना। निष्कर्ष का मतलब उस निरीक्षण के आधार पर अपनी राय तय करना। मैंने स्कूल-कॉलेज पढ़ाई-लिखाई चाहे जिस भी विषय में की हो, लेकिन मैं ऐसा मानता हूँ कि मैं हमेशा …

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भारतीय गणतंत्र के ‘अनिवासी’

भारत के श्यामजी कृष्ण वर्मा पढ़ाई के लिए ऑक्सफर्ड गए और कुछ वर्षों बाद लंदन ही उनका घर बन गया। वहाँ रहकर भी उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए लगातार काम किया। पढ़ाई के लिए ऑक्सफर्ड आने वाले भारतीय छात्रों के लिए स्कॉलरशिप शुरू की। 1905 में इंडियन होम रूल लीग की स्थापना की। भारत …

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कश्मीर की कहानी (भाग 1)

ईस्ट इण्डिया कंपनी की स्थापना सन 1600 में 31 दिसंबर को हुई थी। सन 1608 में कंपनी ने सूरत में अपना पहला व्यापारिक केन्द्र स्थापित किया और सन 1757 में प्लासी की लड़ाई के बाद भारत के कुछ इलाकों का शासन भी कंपनी के हाथों में आ गया और अगले सौ वर्षों तक चलता रहा। …

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कृषि कानून का विवाद

(Click here for English version) ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति के बाद जब वहाँ बड़ी संख्या में कारखानों का निर्माण होने लगा और तेजी से औद्योगिक उत्पादन की शुरुआत हुई, तो उन फैक्ट्रियों को चलाने के लिए सबसे आवश्यक बात यह थी कि उन्हें कच्चा माल लगातार मिलता रहे, उसमें कोई बाधा न आए। ब्रिटिश राज …

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नेताजी और कांग्रेस

सन 1921 में भारत में ‘असहयोग आन्दोलन‘ चल रहा था। उसी आन्दोलन से प्रेरित होकर 25 वर्ष के नवयुवक सुभाषचंद्र बोस भी लंदन से भारत लौट आए थे। 16 जुलाई को मुंबई पहुंचते ही वे गांधीजी से मिलने मणिभवन गए। वे अपने तीन प्रश्नों के बारे में गांधीजी के विचार जानना चाहते थे: यह असहयोग आन्दोलन अपने …

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अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता की कहानी (भाग-४ )

सोवियत संघर्ष (1979-1989) पिछले भाग में मैंने बताया था कि दिसंबर 1979 में बड़ी संख्या में रूसी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में घुस गए और 27 दिसंबर को प्रधानमंत्री हाफ़िजुल्ला अमीन की हत्या कर दी गई। इस प्रकार अफ़ग़ानिस्तान सोवियत रूस के सीधे नियंत्रण में आ गया। उसी दिन पीडीपीए के नेता बाबराक कारमल ने रेडियो काबुल …

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इनर मंगोलिया में चीनी आतंक?

मंगोलिया का नाम बहुत लोगों ने सुना होगा, लेकिन शायद ‘इनर मंगोलिया’ का नहीं। तिब्बत और शिंजियांग में जो हो रहा है, उसके बारे में तो पूरे विश्व में बहुत चर्चा होती है, लेकिन इनर मंगोलिया के बारे में शायद ही कोई जानता हो। इनर मंगोलिया में चीन के विरुद्ध एक बड़ा आंदोलन शुरू हो गया है।

अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता की कहानी (भाग-३)

पिछले भाग में मैंने आपको बताया था कि 27 अप्रैल 1978 के दिन अफ़गानिस्तान में वामपंथियों ने दाऊद खान का तख्तापलट कर दिया और देश की सत्ता अपने कब्जे में ले ली। यह घटना सॉर (अप्रैल) क्रांति कहलाती है। लेकिन यह रातोंरात नहीं हुआ था। इसकी तैयारी बहुत समय से चल रही थी और उसमें …

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अयोध्या आंदोलन का इतिहास

बाबर के सैन्य अधिकारी बाक़ी तश्कबन्दी का जन्म ताशकंद में हुआ था। 1526 में वह भी बाबर के साथ हिंदुस्तान पहुँचा। पानीपत में सैन्य अभियान के बाद उसे वर्तमान मप्र के चन्देरी में और फिर वहाँ से अवध में एक सैन्य अभियान के लिए भेजा गया। बाबर के आदेश पर भारत में तीन मस्जिदों का …

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अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता की कहानी (भाग-२)

लेख के पिछले भाग में मैंने आपको बताया था कि सन 1973 में दाऊद खान ने अफगानिस्तान के राजा ज़हीर शाह के ख़िलाफ़ विद्रोह कर दिया और अफगानिस्तान में राजशाही समाप्त हो गई। ज़हीर शाह उस समय इटली में थे और इस विद्रोह के कारण 2002 तक वे वहीं निर्वासन में रहे। उसी समय से …

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अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता की कहानी (भाग-१)

८ नवंबर १९३३। काबुल के राजमहल में एक समारोह आयोजित था। इस समारोह में अफ़ग़ानिस्तान के राजा मोहम्मद नादिर शाह के हाथों नेजात हाईस्कूल के छात्रों को खेलों में अच्छे प्रदर्शन के लिए मेडल दिए जाने वाले थे। १७ साल का अब्दुल खालिक हज़ारा भी उनमें से एक था। तय समय पर शाह का आगमन …

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नेपाल में क्या हो रहा है?

पिछले एक महीने से नेपाल की राजनीति में भारी उठापटक चल रही है। कुछ दिनों पहले आपने समाचार सुना होगा कि नेपाल सरकार ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई थी कि भारत सरकार दो-तीन ऐसे क्षेत्रों को अपना बता रही है जिन पर नेपाल अपना दावा करता है। इसके बाद नेपाल सरकार ने अपने …

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नागरिकता संशोधन अधिनियम-2019 (CAA)

कैब कानून लागू होने से कुछ लोग नाराज़ हैं, कुछ परेशान हैं और कुछ लोग खुश हैं। लेकिन शायद ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं है कि इस कानून में आखिर है क्या! इसलिए मैं आज इस बारे में लिख रहा हूँ। संविधान के अनुच्छेद 5 से 11 में भारत की नागरिकता के नियम बताए …

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राजीव गांधी: मिस्टर क्लीन या मिस्टर भ्रष्ट?

इंदिरा गांधी की हत्या के कुछ ही घंटों बाद 31 अक्टूबर 1984 को राजीव गांधी भारत के प्रधानमंत्री बनाए गए। डेढ़ महीने बाद ही दिसंबर में लोकसभा चुनाव हुआ और इंदिरा गांधी की हत्या से उपजी सहानुभूति की लहर में कांग्रेस को ऐतिहासिक बहुमत मिला। लोकसभा की 541 में से 414 सीटें कांग्रेस ने जीतीं। …

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आपातकाल की यादें (अंतिम भाग) – अरुण जेटली

आपातकाल कैसे हटा? आपातकाल की अवधि बढ़ते जाने के साथ ही इंदिरा जी पर एक बात के कारण दबाव भी बढ़ने लगा था। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विश्व के नेता इस बात से  चकित थे कि नेहरु जी की बेटी ही लोकतंत्र की राह को छोड़कर तानाशाह बन गई थी। अंतरराष्ट्रीय जगत को यह समझाना इंदिरा …

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आपातकाल की यादें – भाग -२ (अरुण जेटली)

आपातकाल के अत्याचार २६ जून १९७५ को आपातकाल लगाते ही श्रीमती इंदिरा गांधी ने धारा ३५९ के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। इसके परिणामस्वरूप अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता दोनों पर पाबंदी लगा दी गई। केवल सेंसर की अनुमति से प्रकाशित समाचार ही उपलब्ध थे। २९ तारीख …

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आपातकाल की यादें – भाग 1 (अरुण जेटली)

(यह लेख तीन भागों में है) आपातकाल लगाने की नौबत क्यों आई? वर्ष १९७१ और १९७२ श्रीमती इंदिरा गांधी के राजनैतिक करियर के सुनहरे वर्ष थे। उन्होंने अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को और विपक्षी दलों के महागठबंधन को चुनौती दी थी। १९७१ के आम चुनाव में उनकी स्पष्ट विजय हुई। अगले पाँच वर्षों …

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‘सॉफ्ट पॉवर’

अमरीका में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जोसेफ नेई ने 1990 में अपनी एक पुस्तक में ‘सॉफ्ट पॉवर‘ की अवधारणा प्रस्तुत की थी।सैन्य शक्ति, धन-बल आदि ‘हार्ड पॉवर‘ हैं, जिनका उपयोग विश्व के शक्तिशाली देश अन्य देशों को झुकाने या अपनी बात मनवाने के लिए करते हैं। लेकिन प्रोफेसर नेई का तर्क है कि इन पारंपरिक …

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अंकोर वाट

मैंने बचपन में कहीं पढ़ा था कि पूर्वी एशिया में कंबोडिया नाम का कोई देश है और वहां ‘अंकोर वाट‘ नाम का प्राचीन मंदिर है, जो कि विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है। उसी समय से मेरे मन में इसे देखने की इच्छा थी। उस समय तो यह असंभव लगता था, लेकिन अभी कुछ …

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