कैब कानून लागू होने से कुछ लोग नाराज़ हैं, कुछ परेशान हैं और कुछ लोग खुश हैं। लेकिन शायद ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं है कि इस कानून में आखिर है क्या! इसलिए मैं आज इस बारे में लिख रहा हूँ। संविधान के अनुच्छेद 5 से 11 में भारत […]

इंदिरा गांधी की हत्या के कुछ ही घंटों बाद 31 अक्टूबर 1984 को राजीव गांधी भारत के प्रधानमंत्री बनाए गए। डेढ़ महीने बाद ही दिसंबर में लोकसभा चुनाव हुआ और इंदिरा गांधी की हत्या से उपजी सहानुभूति की लहर में कांग्रेस को ऐतिहासिक बहुमत मिला। लोकसभा की 541 में से […]

काँग्रेस का घोषणापत्र मैंने आज देखा। मेरी समझ में जो आया, उनमें से कुछ मुख्य बातें आपकी जानकारी के लिए यहाँ दे रहा हूँ – १. अर्द्ध-कुशल युवाओं को कोई हुनर सिखाने की बजाय काँग्रेस उनसे तालाब खुदवाएगी और बंजर जमीनों पर मजदूरी करवाएगी। इस तरह लाखों रोजगार दिए जाएँगे। […]

सन १८९७ में अंग्रेज़ों ने तिलक जी पर पहली बार राजद्रोह का मुकदमा चलाया था। मुंबई के वकील दिनशॉ डॉवर ने उनका मुकदमा लड़ा था। तब उन्हें अठारह माह की सज़ा सुनाई गई थी। अगली बार १९०८ में फिर एक मुकदमा चला। संयोग से वही दिनशॉ डॉवर अब जज बन […]

सन १८८५ में काँग्रेस की स्थापना के समय से ही इसका नियंत्रण नरम दल वाले नेताओं के हाथों में रहा था। लेकिन १९०५ में बंग-भंग की घोषणा (बंगाल का विभाजन) हुई और नरम दल वालों की सभी याचिकाओं और आवेदनों को अंग्रेज़ों ने कूड़े में दाल दिया, तब यह बात […]

(पिछले भाग यहाँ पढ़ें) लोकमान्य तिलक सन १८९० में काँग्रेस से जुड़े। उस समय काँग्रेस की नीति सरकार से याचना करने, अपनी माँगों के लिए प्रार्थना-पत्र लिखने, और ब्रिटिश शासन की कृपा के लिए धन्यवाद देते रहने की ही थी। काँग्रेस के अधिकतर नेता वाकई मानते थे कि ब्रिटिश शासन […]

(पहला भाग यहाँ पढ़ें) पिछले भाग में मैंने आपको बताया था कि अंग्रेज़ अधिकारी ह्यूम को इस बारे में जानकारी मिली कि अंग्रेज़ों की क्रूरतापूर्ण नीतियों के कारण पूरे भारत में अंसतोष बढ़ रहा है और लोग फिर से १८५७ जैसी क्रांति करने की तैयारी में हैं। ह्यूम ने इस […]

पिछले कुछ दिनों से मैं यह पुस्तक पढ़ रहा था, जो कि आज पूरी हुई। पुस्तक मुख्यतः अमरीकी राजनीति पर केंद्रित है और अमरीकी वामपंथ के विरुद्ध है। यह ध्यान रखें कि अमरीका में वामपंथ का स्वरूप भारत से बिल्कुल अलग है। लेखक का तर्क है कि अमरीका का पूरा […]

आजकल काँग्रेस के लोगों को आडवाणी जी की चिंता सता रही है। वैसे इसकी शुरुआत तभी से हो गई थी, जब २०१४ में मोदीजी प्रधानमंत्री बने। पहले काँग्रेस को यह चिंता हुई कि मोदी ने आडवाणी जी को प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया, उसके बाद यह चिंता हुई कि राष्ट्रपति भी […]

जिन सावरकर जी की लिखी पंक्तियाँ अंदमान जेल से पिछली सरकार ने उखाड़कर फेंक दी थीं, उसी अंदमान जेल में जाकर देश का प्रधानमंत्री सावरकर जी की स्मृति में शीश झुकाता है, ये भी मेरे लिए अच्छे दिन हैं। नकारात्मक विचारों वाले लोग इस बात का हिसाब लगाने और शिकायती […]