काँग्रेस का घोषणापत्र मैंने आज देखा। मेरी समझ में जो आया, उनमें से कुछ मुख्य बातें आपकी जानकारी के लिए यहाँ दे रहा हूँ – १. अर्द्ध-कुशल युवाओं को कोई हुनर सिखाने की बजाय काँग्रेस उनसे तालाब खुदवाएगी और बंजर जमीनों पर मजदूरी करवाएगी। इस तरह लाखों रोजगार दिए जाएँगे। […]

सन १८९७ में अंग्रेज़ों ने तिलक जी पर पहली बार राजद्रोह का मुकदमा चलाया था। मुंबई के वकील दिनशॉ डॉवर ने उनका मुकदमा लड़ा था। तब उन्हें अठारह माह की सज़ा सुनाई गई थी। अगली बार १९०८ में फिर एक मुकदमा चला। संयोग से वही दिनशॉ डॉवर अब जज बन […]

सन १८८५ में काँग्रेस की स्थापना के समय से ही इसका नियंत्रण नरम दल वाले नेताओं के हाथों में रहा था। लेकिन १९०५ में बंग-भंग की घोषणा (बंगाल का विभाजन) हुई और नरम दल वालों की सभी याचिकाओं और आवेदनों को अंग्रेज़ों ने कूड़े में दाल दिया, तब यह बात […]

(पिछले भाग यहाँ पढ़ें) लोकमान्य तिलक सन १८९० में काँग्रेस से जुड़े। उस समय काँग्रेस की नीति सरकार से याचना करने, अपनी माँगों के लिए प्रार्थना-पत्र लिखने, और ब्रिटिश शासन की कृपा के लिए धन्यवाद देते रहने की ही थी। काँग्रेस के अधिकतर नेता वाकई मानते थे कि ब्रिटिश शासन […]