अफ़ग़ानिस्तान

अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता की कहानी (भाग-४ )

सोवियत संघर्ष (1979-1989) पिछले भाग में मैंने बताया था कि दिसंबर 1979 में बड़ी संख्या में रूसी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में घुस गए और 27 दिसंबर को प्रधानमंत्री हाफ़िजुल्ला अमीन की हत्या कर दी गई। इस प्रकार अफ़ग़ानिस्तान सोवियत रूस के सीधे नियंत्रण में आ गया। उसी दिन पीडीपीए के नेता बाबराक कारमल ने रेडियो काबुल से यह घोषणा की कि ‘हाफ़िजुल्ला अमीन के क्रूर और हिंसक शासन का अंत हो गया है। उसने यह भी …

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अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता की कहानी (भाग-३)

पिछले भाग में मैंने आपको बताया था कि 27 अप्रैल 1978 के दिन अफ़गानिस्तान में वामपंथियों ने दाऊद खान का तख्तापलट कर दिया और देश की सत्ता अपने कब्जे में ले ली। यह घटना सॉर (अप्रैल) क्रांति कहलाती है। लेकिन यह रातोंरात नहीं हुआ था। इसकी तैयारी बहुत समय से चल रही थी और उसमें कई लोगों की भूमिका थी। पिछले भाग में मैंने आपको अफ़गानिस्तान की वामपंथी राजनैतिक पार्टी पीडीपीए के ‘खल्क’ और ‘परचम’ …

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अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता की कहानी (भाग-२)

लेख के पिछले भाग में मैंने आपको बताया था कि सन 1973 में दाऊद खान ने अफगानिस्तान के राजा ज़हीर शाह के ख़िलाफ़ विद्रोह कर दिया और अफगानिस्तान में राजशाही समाप्त हो गई। ज़हीर शाह उस समय इटली में थे और इस विद्रोह के कारण 2002 तक वे वहीं निर्वासन में रहे। उसी समय से अफगानिस्तान में हिंसा, अस्थिरता और गृह-युद्ध का एक दुःखद अध्याय शुरू हुआ, जो आज तक चल रहा है। दाऊद खान …

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अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता की कहानी (भाग-१)

८ नवंबर १९३३। काबुल के राजमहल में एक समारोह आयोजित था। इस समारोह में अफ़ग़ानिस्तान के राजा मोहम्मद नादिर शाह के हाथों नेजात हाईस्कूल के छात्रों को खेलों में अच्छे प्रदर्शन के लिए मेडल दिए जाने वाले थे। १७ साल का अब्दुल खालिक हज़ारा भी उनमें से एक था। तय समय पर शाह का आगमन हुआ। लोगों का अभिवादन करके उन्होंने टेबल पर सजे मेडलों को देखा और फिर छात्रों की ओर बढ़े। तभी अचानक …

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