इतिहास

काश्मीर की कहानी (भाग-2)

आजादी के बाद लगभग 565 रियासतों का भारत में पूर्ण विलय हो गया। लेकिन काश्मीर को लेकर आज तक विवाद क्यों चल रहा है? पढ़िए कश्मीर की पूरी कहानी मेरे ब्लॉग पर।

नेताजी और कांग्रेस

सन 1921 में भारत में ‘असहयोग आन्दोलन‘ चल रहा था। उसी आन्दोलन से प्रेरित होकर 25 वर्ष के नवयुवक सुभाषचंद्र बोस भी लंदन से भारत लौट आए थे। 16 जुलाई को मुंबई पहुंचते ही वे गांधीजी से मिलने मणिभवन गए। वे अपने तीन प्रश्नों के बारे में गांधीजी के विचार जानना चाहते थे: यह असहयोग आन्दोलन अपने अंतिम चरण तक कैसे पहुंचेगा? ब्रिटिश सरकार का बहिष्कार करने से भारत की आज़ादी के लिए आवश्यक दबाव कैसे बनेगा? …

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अयोध्या आंदोलन का इतिहास

बाबर के सैन्य अधिकारी बाक़ी तश्कबन्दी का जन्म ताशकंद में हुआ था। 1526 में वह भी बाबर के साथ हिंदुस्तान पहुँचा। पानीपत में सैन्य अभियान के बाद उसे वर्तमान मप्र के चन्देरी में और फिर वहाँ से अवध में एक सैन्य अभियान के लिए भेजा गया। बाबर के आदेश पर भारत में तीन मस्जिदों का निर्माण हुआ था। एक संभल में, एक पानीपत में और एक अयोध्या में। अयोध्या वाली मस्जिद 1528 में रामकोट के …

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आपातकाल की यादें (अंतिम भाग) – अरुण जेटली

आपातकाल कैसे हटा? आपातकाल की अवधि बढ़ते जाने के साथ ही इंदिरा जी पर एक बात के कारण दबाव भी बढ़ने लगा था। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विश्व के नेता इस बात से  चकित थे कि नेहरु जी की बेटी ही लोकतंत्र की राह को छोड़कर तानाशाह बन गई थी। अंतरराष्ट्रीय जगत को यह समझाना इंदिरा जी के लिए बहुत कठिन होता जा रहा था कि आपातकाल का दौर वाकई अस्थायी है और हमेशा आपातकाल लागू …

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आपातकाल की यादें – भाग -२ (अरुण जेटली)

आपातकाल के अत्याचार २६ जून १९७५ को आपातकाल लगाते ही श्रीमती इंदिरा गांधी ने धारा ३५९ के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। इसके परिणामस्वरूप अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता दोनों पर पाबंदी लगा दी गई। केवल सेंसर की अनुमति से प्रकाशित समाचार ही उपलब्ध थे। २९ तारीख को इंदिरा जी ने भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के नाम पर बीस-सूत्रीय कार्यक्रम की घोषणा की, हालांकि वास्तव में इसका …

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आपातकाल की यादें – भाग 1 (अरुण जेटली)

(यह लेख तीन भागों में है) आपातकाल लगाने की नौबत क्यों आई? वर्ष १९७१ और १९७२ श्रीमती इंदिरा गांधी के राजनैतिक करियर के सुनहरे वर्ष थे। उन्होंने अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को और विपक्षी दलों के महागठबंधन को चुनौती दी थी। १९७१ के आम चुनाव में उनकी स्पष्ट विजय हुई। अगले पाँच वर्षों तक वे राजनैतिक सत्ता का सबसे प्रमुख केंद्र बानी रहीं। उनकी पार्टी में कोई नेता नहीं था, जो उन्हें चुनौती …

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एडोल्फ आइकमन और मोसाद

आपने एडोल्फ हिटलर का नाम तो अवश्य सुना होगा, लेकिन क्या आपने एडोल्फ आइकमन का नाम सुना है? आपने इजराइल के बारे में भी सुना होगा, लेकिन क्या आपने मोसाद का नाम सुना है? क्या आपको पता है कि इजराइल की ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद ने किस तरह बिल्कुल फ़िल्मी तरीके से हिटलर के साथी आइकमन को युद्ध के कई सालों बाद पकड़ा और इजराइल लाकर मौत की सज़ा दी? आइये इतिहास के इस रोमांचक अध्याय …

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