अंकोर वाट

मैंने बचपन में कहीं पढ़ा था कि पूर्वी एशिया में कंबोडिया नाम का कोई देश है और वहां ‘अंकोर वाट‘ नाम का प्राचीन मंदिर है, जो कि विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है। उसी समय से मेरे मन में इसे देखने की इच्छा थी। उस समय तो यह असंभव लगता था, लेकिन अभी कुछ ही दिनों पहले वह काम पूरा हो गया।

पूर्वी एशिया के देशों, जैसे थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस आदि के साथ भारत का बहुत प्राचीन और गहरा संबंध रहा है। अतीत में इन सभी देशों में कई शताब्दियों तक हिन्दू और बौद्ध राज्य रहे हैं। रामायण और महाभारत का भी इनमें से अधिकांश देशों में प्रभाव रहा है। आज भी इनमें से कुछ देशों में शासन का प्रतीकात्मक प्रमुख कोई बौद्ध राजा ही है। इन देशों के इतिहास, यहां के प्राचीन राज्यों, धर्म, संस्कृति और भारत के साथ इनके संपर्क व संबंध के बारे में मैं आगे कभी लिखूंगा। आज की पोस्ट केवल अंकोर वाट की मेरी यात्रा और इस बहाने यहां के संक्षिप्त इतिहास पर केंद्रित है।

कंबोडिया की राजधानी और यहां का सबसे बड़ा शहर नोम पेन्ह है, जो कि देश के दक्षिणी भाग में है। लेकिन अंकोर वाट मंदिर कंबोडिया के उत्तरी क्षेत्र में स्थित है और स्याम रीप (इसे सीम रीप भी कहते हैं)। मुझे पक्का नहीं पता कि इस शहर का नाम स्याम रीप है या सीम रीप, लेकिन मुझे लगता है कि सही नाम स्याम रीप ही है क्योंकि मैंने कहीं पढ़ा था कि इस शहर का यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि एक ऐतिहासिक युद्ध में इसी स्थान पर थाई सेना की निर्णायक पराजय हुई थी। थाईलैंड का प्राचीन नाम स्याम है, और कंबोडियाई भाषा में स्याम रीप का अर्थ है – स्याम सेना की अंतिम हार (या पूर्ण पराजय)। स्याम रीप की जनसंख्या लगभग २ लाख है। यहां का समय सिंगापुर से एक घंटा पीछे और भारत से डेढ़ घंटे आगे है, अर्थात जब भारत में दोपहर के १२ बजते हैं, तब कंबोडिया की घड़ियों में दोपहर डेढ़ बजे का समय होता है।

स्याम रीप हवाई अड्डा

अंकोर वाट के निकट होने के कारण स्याम रीप ही कंबोडिया का सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल और सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है। इसी कारण यहां हर बजट के अनुरूप कई होटल, रेस्त्रां आदि उपलब्ध हैं। हवाई अड्डे से स्याम रीप शहर की दूरी लगभग ८ किमी है। मेरी योजना हवाई अड्डे से सीधे ही अंकोर वाट और अन्य मंदिर देखने जाने की थी। उसी के अनुसार मैंने एक दिन पहले ही होटल के कर्मचारी से बात की थी कि मेरे लिए एक कार और गाइड को हवाई अड्डे पर भेज दें। मैं दिन भर अंकोर वाट और अन्य मंदिर देखने के बाद सीधे शाम को ही होटल जाना चाहता था। लेकिन उस कर्मचारी ने गड़बड़ कर दी। उसने गाड़ी तो अवश्य भेजी, लेकिन कोई गाइड नहीं भेजा और वह गाड़ी मुझे हवाई अड्डे से होटल ले आई। अब तुरंत गाइड उपलब्ध करवा पाना उनके लिए संभव नहीं था और मेरा विचार भी अब बदल गया था, इसलिए उन्होंने मेरे लिए एक टुकटुक (अपने ऑटोरिक्शा जैसा वहां का जुगाड़) की व्यवस्था की और मैं अंकोर वाट की अपनी यात्रा पर निकल पड़ा।

टुकटुक

अंकोर वाट विश्व का हिन्दू मंदिर विश्व का सबसे बड़ा पूजा स्थल है और कंबोडिया के राष्ट्र ध्वज पर भी इसी का चित्र है, संभवतः इन्हीं कारणों से यह बहुत प्रसिद्ध भी है। लेकिन इस पूरे क्षेत्र में अंकोर वाट के अलावा भी कई बहुत सारे प्राचीन मंदिर हैं। अंकोर वाट के अलावा अंकोर थोम एक बहुत बड़ा इलाका है, जहां कई मंदिर और पुरानी इमारतों के अवशेष मौजूद हैं। वास्तव में यह पहले एक पूरा शहर था। अंकोर शब्द संस्कृत के ‘नगर’ शब्द से बना है और ‘वाट’ भी संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ चारों ओर से घिरी हुई भूमि या परिसर। थाई और ख्मेर (कंबोडिया की भाषा) में वाट का अर्थ मंदिर भी होता है, इसी कारण इन देशों के कई मंदिरों के नाम में आपको वाट शब्द मिलेगा। कंबोडिया का प्राचीन नाम कंबोज या कंबुज था और कौण्डिन्य नामक एक भारतीय व्यक्ति ने इस हिन्दू राज्य की नींव रखी थी।

यह पूरा क्षेत्र संरक्षित है और इसमें प्रवेश करने के लिए पर्यटकों को टिकट खरीदना पड़ता है। हालांकि कंबोडिया की मुद्रा राइल है, लेकिन यहां अमरीकी डॉलर ही ज्यादा प्रचलित है। एयरपोर्ट के अलावा अन्य सभी जगहों पर दुकानों और होटलों में कीमतें अमरीकी डॉलर में ही लिखी हुई थीं। अंकोर संरक्षित क्षेत्र में प्रवेश के लिए एक दिन के टिकट का मूल्य ३७ अमरीकी डॉलर है। आप तीन दिन या सात दिन का टिकट भी ले सकते हैं। यहां टिकट देते समय आपका फ़ोटो खींचा जाएगा और यह उस टिकट पर भी छपा रहेगा।

ता प्रोम

ता प्रोम

टिकट लेने के बाद हम टुकटुक से आगे बढ़े और सबसे पहले हम ‘ता प्रोम’ मंदिर गए। इसके जीर्णोद्धार का काम भारतीय पुरातत्व विभाग के सहयोग से चल रहा है, इसलिए यहां कई सूचना बोर्ड्स पर हिन्दी में भी जानकारी पढ़ने को मिली। स्वाभाविक है कि विदेश में हिन्दी को देखकर मुझे बहुत ख़ुशी हुई।

मुख्यतः आठवीं से बारहवीं शताब्दी तक कंबोडिया में हिन्दू और बौद्ध राज्य रहे। इसी दौरान अंकोर वाट, अंकोर थोम और ता प्रोम आदि जैसे मंदिर, मठों, विहारों आदि का निर्माण हुआ था।

ता प्रोम

‘ता प्रोम’ शब्द ‘पिता ब्रह्म’ का अप्रभ्रंश है। ता प्रोम मंदिर का पूरा नाम ‘प्रासात ता प्रोम’ (ब्रह्म का प्रासाद) है और इसका प्राचीन नाम ‘राजविहार’ था। इसका निर्माण बारहवीं और तेरहवीं शताब्दी के दौरान यहां के राजा जयवर्मन सप्तम ने करवाया था। यह उस समय महायान बौद्ध संप्रदाय का मठ और विश्वविद्यालय था। आज इसके अधिकांश भाग का जीर्णोद्धार पूरा हो चुका है। इसकी एक विशेषता यह है कि यहां पत्थर की इमारतों के ऊपर और पत्थरों की दरारों के बीच से भी बड़े-बड़े पेड़ों की जड़ें गहराई तक जमी हुई हैं। भारत में भी पुराने घरों या इमारतों की दीवारों पर या आसपास मैंने छोटे पेड़-पौधे उगे हुए देखे हैं, लेकिन ता प्रोम में यह दृश्य वाकई बहुत अनोखा लगता है।

ता केओ
ता प्रोम में कुछ समय बिताने के बाद हम वहां से कुछ ही दूरी पर स्थित ता केओ मंदिर में गए। यह पूरा क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ है, इसलिए सड़क के दोनों ओर खूब हरे-भरे पेड़ थे, ठंडी हवा चल रही थी और धूप बिल्कुल महसूस नहीं हो रही थी। लेकिन मंदिरों के आसपास जहां पेड़ नहीं हैं, वहां भीषण गर्मी थी। साथ ही अधिकांश मंदिरों तक पहुंचने के लिए छोटी और ऊंची-ऊंची बहुत सारी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। यह गर्मी और चढ़ाई बूढ़ों और बच्चों के लिए बहुत कठिन होगी। चूंकि मैं अकेला गया था, इसलिए मुझे कम दिक्कत हुई, लेकिन गर्मी के कारण मैं कई बार पसीने से तरबतर हो गया था।

ता केओ

ता केओ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसका प्राचीन नाम हेमगिरी (स्वर्ण पर्वत) इसका निर्माण सन ९७५ के आसपास राजा जयवर्मन पंचम ने प्रारंभ करवाया था, लेकिन यह काम पूरा नहीं हो सका। एक शिलालेख से पता चलता है कि आसमानी बिजली गिरने के कारण मंदिर का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसे एक बुरा संकेत मानकर निर्माण-कार्य रोक दिया गया। लेकिन इसके बावजूद भी आगे १३वीं शताब्दी तक यह एक मुख्य धार्मिक केंद्र बना रहा। इन दिनों यहां चीनी सरकार के सहयोग से परिसर का जीर्णोद्धार जारी है।


बायन मंदिर

बायन

इसके बाद ‘चाऊ से तेवोदा’, ‘धर्मराज मंदिर’ (यह टेरेस ऑफ़ लेपर किंग के नाम से ही प्रचलित है) तथा कुछ अन्य मंदिरों को देखने के बाद हम ‘विजय द्वार’ को पर करके बायन मंदिर पहुंचे। ख्मेर भाषा में इसका नाम ‘प्रासात बायन’ है। विकिपीडिया के अनुसार इस मंदिर का निर्माण १२वीं और १३वीं सदी के दौरान महायान बौद्ध शासक जयवर्मन सप्तम ने करवाया था। लेकिन उसकी मृत्यु के बाद आगे हिन्दू और थेरवाद बौद्ध संप्रदाय को मानने वाले राजा ने अपनी-अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परिवर्तन करवाते रहे। मुस्कुराती हुई विशाल मूर्तियां इस मंदिर की सबसे अनूठी विशेषता है। इस मंदिर परिसर में कई छोटे-छोटे अन्य मंदिर भी हैं। कई मंदिरों में और प्रवेश-द्वारों के बाहर नागों की भी बड़ी-बड़ी मूर्तियां हैं।

अंकोर वाट
अब हम अंकोर वाट के मुख्य मंदिर की ओर गए। अब लगभग दोपहर २ बजे का समय हो रहा था, इसलिए पहले एक रेस्तरां में शाकाहारी कंबोडियाई भोजन का स्वाद चखा और फिर मैं अंकोर वाट मंदिर की ओर बढ़ा।
अंकोर वाट सचमुच एक भव्य मंदिर है और इसका परिसर बहुत विशाल है। लगभग १६२ हेक्टेयर में फैला यह मंदिर परिसर अब यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल है। इसका निर्माण बारहवीं शताब्दी में सूर्यवर्मन द्वितीय ने करवाया था। उस समय इस शहर का नाम यशोधरपुर था और यह ख्मेर राज्य की राजधानी थी। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है।

मैं अंकोरवाट परिसर में

अंकोर वाट को विष्णुलोक की प्रतिकृति के रूप में बनाया गया है और संभवतः इसका प्राचीन नाम “वराह विष्णुलोक” था। इसके चारों ओर पानी से भरा खंदक है, जो महासागर का प्रतीक है। प्रवेश द्वार के पास सात फनों वाले नागों की विशाल प्रतिमाएं हैं, जो स्वर्ग के प्रवेश द्वारा इंद्रधनुष को दर्शाते हैं। अंकोर वाट का मुख्य शिखर स्वर्ग के मेरु पर्वत का प्रतीक है और चारों ओर बने अन्य छोटे शिखर विभिन्न पर्वतों के प्रतीक हैं। इस मंदिर के विभिन्न हिस्से चार युगों के प्रतीक हैं, अर्थात् हम कलियुग से इसमें प्रवेश करते हैं और धीरे-धीरे एक-एक युग को पार करते हुए भीतर भगवान् विष्णु की प्रतिमा तक पहुंचते हैं। पूरे मंदिर परिसर में अप्सराओं की लगभग तीन हज़ार मूर्तियां उकेरी हुई हैं।

अंकोर वाट में भगवान विष्णु की प्रतिमा

इन मूर्तियों की एक विशेषता यह है कि कोई भी दो मूर्तियां एक जैसी नहीं हैं, हर मूर्ति अनूठी है। इसके अलावा मंदिर की दीवारों पर स्वर्ग-नर्क, रामायण व महाभारत के अनेक प्रसंगों, समुद्र-मंथन आदि के दृश्य उकेरे हुए हैं। साथ ही, हाथियों, घोड़ों और अन्य विभिन्न पशु-पक्षियों की आकृतियां भी हैं।

इस मंदिर का निर्माण-कार्य पूरा होने से पहले ही एक युद्ध में राजा सूर्यवर्मन की मृत्यु हो गई और जल्दी ही मंदिर निर्माण का काम भी रुक गया। आगे कंबोज पर महायान बौद्ध राजाओं का शासन हो गया और उन्होंने इसे बौद्ध मंदिर के रूप में बदल दिया। आगे हिन्दू और थेरवाद बौद्ध संप्रदाय के शासक अपने-अपने काल में अपनी मान्यताओं के अनुसार इसमें परिवर्तन करते रहे। लगातार जारी युद्धों और आक्रमणों के कारण आगे कुछ शताब्दियों तक यह क्षेत्र वीरान रहा और इसके सभी मंदिर घने जंगलों से घिर गए। लेकिन फिर भी अंकोर वाट एक बौद्ध मठ के रूप में लगातार उपयोग में बना रहा। सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दियों के दौरान कुछ जापानी, पुर्तगाली और फ्रांसीसी आगंतुक भी यहां आते रहे। लेकिन मुख्य रूप से उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी में विश्व का ध्यान इस मंदिर की ओर गया, जिसके बाद इसकी देखरेख और सुरक्षा के प्रयास प्रांरभ हुए और यह विश्व विरासत सूची में भी जुड़ा।

अंकोर राष्ट्रीय संग्रहालय
दिनभर इस इलाके में घूमने और कई मंदिरों को देखने के बाद अगले दिन सुबह मैं स्याम रीप शहर में अंकोर राष्ट्रीय संग्रहालय देखने गया। यह पुरातात्विक संग्रहालय अंकोर काल की पुरातात्विक धरोहर को संजोने पर केन्द्रित है। यहां कुल आठ गैलरियां हैं। १००० बुद्धों की गैलरी में भगवान बुद्ध की प्रतिमाओं का संग्रह है।

अंकोर नेशनल म्यूज़ियम में भगवान गणेश

इसके अलावा अन्य गैलरियों में ख्मेर सभ्यता, यहां प्रचलित धर्मों और मान्यताओं, महान ख्मेर राजाओं, प्राचीन वेशभूषा व पोशाकों आदि की गैलरियां हैं। अंकोर वाट और अंकोर थोम की गैलरियों में विभिन्न मंदिरों के इतिहास, आध्यात्मिक परिकल्पनाओं और स्थापत्य आदि का चित्रण है। शिलालेखों की गैलरी में विभिन्न कालों के अनेक शिलालेख संरक्षित हैं। यह बहुत बड़ा संग्रहालय है और यदि इस विषय में आपकी रुचि है, तो यहां देखने लायक बहुत-कुछ है। इसे अच्छी तरह देखने के लिए कम से कम २-३ घंटों का समय आवश्यक है। मंदिरों और संग्रहालय के अलावा भी स्याम रीप और इसके आस-पास कुछ अन्य दर्शनीय स्थल भी हैं। मैंने सुना है कि यहां युद्ध का एक संग्रहालय भी देखने लायक है और कुछ किलोमीटर की दूरी पर एक बड़ी झील है, जहां कई पर्यटक जाते हैं। लेकिन समय की कमी के कारण मेरे लिए कहीं और जाना संभव नहीं था। इसलिए अपनी दो दिनों की संक्षिप्त यात्रा पूरी करके मैं दूसरे दिन शाम को सिंगापुर लौट आया (तब मैं सिंगापुर में रहता था)।

स्त्रोत:
१. https://en.wikipedia.org/wiki/Angkor_Wat
२. https://www.lonelyplanet.com/cambodia/travel-tips-and-articles/77381
३. https://en.wikipedia.org/wiki/Angkor_National_Museum

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